Vaishakh Purnima 2024: वैशाख पूर्णिमा व्रत कब 22 या 23 मई,करें पीपल पेड़ की पूजा

नई दिल्ली – वैशाख महीने में पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि का हिंदू धर्म में खास महत्व होता है. इसे पीपल पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है और इसी दिन बुद्ध पूर्णिमा भी मनाई जाती है. बता दें कि इस वर्ष वैशाख पूर्णिमा गुरुवार 23 मई को पड़ रही है.

वैशाख पूर्णिमा 23 मई को मानी जा रही है

.इस साल वैशाख पूर्णिमा 23 मई को मानी जा रही है. इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा के लिए बहुत ही उत्तम दिन माना जाता है. वैशाख महीने की पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध का भी जन्म हुआ था. इसलिए इस दिन का महत्व दो गुना हो जाता है. वैशाख पूर्णिमा पर सत्यनारायण की कथा करने वालों को मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है.इसी प्रकार धन की देवी की कृपा पाने के लिए पूर्णिमा पर पूजा पाठ के अलावा कुछ खास चीजों को खरीद कर घर लाएं. ज्योतिषाचार्य पंडित पंकज पाठक ने लोकल18 को बताया कि इस बार वैशाख पूर्णिमा में व्रत की पूर्णिमा 22 मई की मानी जा रही है. 23 मई को स्नान दान की पूर्णिमा मानी गई है.

पीपल के पेड़ की पूजा करना बहुत फलदायी

पूर्णिमा व्रत प्रत्येक मास की प्रदोषव्यापिनी और चंद्रोदय व्यापिनी पूर्णिमा में किया जाना चाहिए। इस व्रत को प्रदोषकाल में करने का विधान हैं। अर्थात् पूर्णिमा दोनों दिन प्रदोष में व्याप्त हो, तो अगले दिन तथा दोनों दिन प्रदोषकाल की व्याप्ति के अभाव में भी अगले दिन ही व्रत हेतु ग्रहण करें। इस वर्ष वैशाख पूर्णिमा दो दिन 22 मई, 2024 ई. को पूर्ण रूप से तथा 23 मई, 2024 ई. को प्रदोष के प्रारम्भक्षण (सूर्यास्तकाल) को स्पर्शमात्र कर रही है। इसलिए कहा जा रहा कि 23 मई को वैशाख पूर्णिमा व्रत करना चाहिए।वैशाख पूर्णिमा के दिन स्नान-दान और व्रत के साथ ही पीपल वृक्ष की पूजा जरूर करें. वैसे तो शास्त्रों में पीपल वृक्ष की पूजा के कई लाभ बताए गए हैं. लेकिन इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करना बहुत फलदायी होता है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती है.

क्या है पुष्करणी और उसकी महिमा

स्कन्द पुराण के अनुसार पूर्व काल में वैशाख मास की एकादशी तिथि को अमृत प्रकट हुआ, द्वादशी को भगवान विष्णु ने उसकी रक्षा की, त्रयोदशी को श्रीविष्णु ने देवताओं को सुधापान कराया तथा चतुर्दशी को देवविरोधी दैत्यों का संहार किया और वैशाख की पूर्णिमा के दिन ही समस्त देवताओं को उनका साम्राज्य प्राप्त हो गया. अतः देवताओं ने प्रसन्न होकर इन तीन तिथियों को वर दिया -‘वैशाख मास की ये तीन शुभ तिथियां मनुष्य के समस्त पापों का नाश करने वाली तथा सब प्रकार के सुख प्रदान करने वाली हों’. वैशाख के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी से लेकर पूर्णिमा तक की तिथियां ‘पुष्करणी ‘ कही गयीं हैं,ये बड़ी पवित्र और शुभकारक हैं एवं सब पापों का क्षय करने वाली हैं.इनमें स्नान, प्रभु का ध्यान एवं दान-पुण्य करने से पूरे माह स्नान का फल मिल जाता है.महीने भर नियम निभाने में असमर्थ प्राणी यदि उक्त तीन दिन भी कामनाओं का संयम कर सके तो उतने से ही पूर्ण फल को पाकर भगवान विष्णु के धाम में आनंद का अनुभव करता है.जो मनुष्य वैशाख मास में अंतिम तीन दिन गीता का पाठ करता है,उसे प्रतिदिन अश्वमेघ यज्ञ का फल प्राप्त होता है ऐसा शास्त्रों का कथन है.जो इन तीन दिनों में विष्णुसहस्त्र नाम का पाठ करता है उसे भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है.

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