UAPA केस में न्यूजक्लिक के फाउंडर को मिली राहत,सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत रिहा करने के दिए आदेश

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने UAPA के तहत जेल में बंद न्यूजक्लिक के फाउंडर और एडिटर इन चीफ प्रबीर पुरकायस्थ की रिहाई का आदेश दिया है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने फैसला सुनाया। राष्ट्र विरोधी प्रचार को बढ़ावा देने के लिए चीनी फंडिंग को लेकर यूएपीए के तहत अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए पुरकायस्थ ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

कोर्ट ने गिरफ्तारी पर उठाए थे सवाल

इससे पहले शीर्ष अदालत ने प्रबीर पुरकायस्थ की याचिका पर सुनवाई के दौरान उनकी गिरफ्तारी पर कई सवाल उठाए थे। कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा था कि दिल्ली पुलिस ने पुरकायस्थ की गिरफ्तारी के बाद उनके वकील को सूचित किए बिना मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने में जल्दबाजी क्यों की? जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने हैरानी जताते हुए कहा था कि पुरकायस्थ के वकील को रिमांड आवेदन दिए जाने से पहले ही रिमांड आदेश कैसे पारित कर दिया गया था?

शीर्ष कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था

पीठ ने गिरफ्तारी के तौर-तरीके पर सवाल उठाते हुए गैर-कानूनी गतिविधियां निरोधक अधिनियम 1967 के तहत इस मामले में गिरफ्तारी और रिमांड को चुनौती देने वाली पुरकायस्थ की याचिका पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

पिछले साल अक्टूबर में किया गया था गिरफ्तार

प्रबीर पुरकायस्थ पर आरोप है कि उन्होंने न्यूजक्लिक पोर्टल के जरिए राष्ट्रविरोधी प्रचार को बढ़ावा देने के लिए चीन से फंडिंग हासिल की। इस ममले में उन्हें पिछले साल अक्टूबर में गिरफ्तार किया गया था। वह तभी से न्यायिक हिरासत में हैं। सुनवाई के दौरान पुरकायस्थ के वकील कपिल सिब्बल की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

इस मामले में सवालों के घेरे में क्यों आईं दिल्ली पुलिस

सुप्रीम कोर्ट ने 30 अप्रैल को पोर्टल न्यूजक्लिक के संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को गिरफ्तारी के बाद उनके वकील को सूचित किए बिना मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने में जल्दबाजी के लिए दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए थे. जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस तथ्य पर भी हैरानी जताई कि पुरकायस्थ के वकील को रिमांड आवेदन दिए जाने से पहले ही रिमांड आदेश पारित कर दिया गया था.

कथित चीनी फंडिंग के मामले हुई थीं गिरफ्तारी

पीठ ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 1967 के तहत एक मामले में उनकी गिरफ्तारी और रिमांड को चुनौती देने वाली पुरकायस्थ की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. पोर्टल के माध्यम से राष्ट्र-विरोधी प्रचार को बढ़ावा देने के लिए कथित चीनी फंडिंग के मामले में पिछले साल अक्टूबर को गिरफ्तारी के बाद से पुरकायस्थ हिरासत में हैं. सुनवाई के दौरान पुरकायस्थ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्हें 3 अक्टूबर, 2023 की शाम को गिरफ्तार किया गया था. उन्हें अगले दिन सुबह 6 बजे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था.

पीठ ने पूछा सवाल कि पुरकायस्थ के वकील क्यों नहीं किया गया सूचित

कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि अतिरिक्त लोक अभियोजक के साथ लीगल एड वकील ही मौजूद थे. यहां तक कि पुरकायस्थ के वकील को सूचित नहीं किया गया था. जब पुरकायस्थ ने इस पर आपत्ति जताई तो जांच अधिकारी ने उनके वकील को टेलीफोन के माध्यम से सूचित किया और रिमांड आवेदन वकील को व्हाट्सएप पर भेजा गया. पीठ ने ASG एसवी राजू से पूछा कि पुरकायस्थ के वकील को सूचित क्यों नहीं किया गया.

गंभीर आरोप

न्‍यूजक्लिक के संपादक प्रबीर पुरकायस्‍थ पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. अभियोजन पक्ष का कहना है कि उन्‍होंने न्‍यूजक्लिक पोर्टल के जरिये राष्‍ट्रविरोधी प्रचार बढ़ावा देने के लिए चीन से फंडिंग हासिल की थी. इस मामले में उन्‍हें 3 अक्‍टूबर 2023 को गिरफ्तार किया गया था. उन्‍हें 4 अक्‍टूबर को मजिस्‍ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था. दिल्‍ली पुलिस की चार्जशीट में IPC की धारा 153A, 120A और UAPA की धारा 13, 16, 17, 18, 22C, 39 और 40 के तहत आरोप लगाए गए हैं. इन सख्‍त धाराओं के तहत वेबसाइट के फाउंडर को आरोपी बनाया गया है. दिल्‍ली पुलिस का कहना है कि उनके केस में कुल 8 प्रोटेक्टेड गवाह हैं.

लंबी बहस के बाद आखिरकार पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया

सुबह 6 बजे उसे पेश करने की जल्दबाजी क्या थी जबकि उन्हें पिछले दिन शाम 5.45 बजे गिरफ्तार किया गया था. आपके पास पूरा दिन था. पीठ ने कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के लिए आवश्यक है कि रिमांड आदेश पारित होने पर पुरकायस्थ का वकील उपस्थित रहे. राजू ने पीठ को तर्क देकर समझाने की कोशिश की लेकिन पीठ ने इस तर्क को मानने से इनकार कर दिया. लंबी बहस के बाद आखिरकार पीठ ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

अमित चक्रवर्ती ने भी अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था

पीठ पुरकायस्थ की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें दिल्ली पुलिस द्वारा उनकी गिरफ्तारी को बरकरार रखने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया गया था. सह-अभियुक्त और प्रमुख अमित चक्रवर्ती ने भी अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था लेकिन ईडी के सरकारी गवाह बनने के बाद उन्हें अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दी गई.

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