सिक्किम में BJP का हुआ बुरा हाल,दोस्‍त ने ही कर दिया जीरो

नई दिल्लीः सिक्किम विधानसभा चुनाव के नतीजों में सत्तारूढ़ सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा की एकतरफा आंधी चली। पार्टी ने प्रचंड जीत हासिल करते हुए 32 में से 31 सीट पर कब्जा जमा लिया है। वहीं, विपक्षी पार्टी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट को मात्र एक सीट पर जीत मिली है।

सिक्किम में BJP का बुरा हाल

भारतीय जनता पार्टी ने सिक्किम में 31 विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ा, लेकिन वह एक भी सीट नहीं जीत पायी है. बीजेपी के इस खराब प्रदर्शन की वजह एसकेएम और बीजेपी का अलग-अलग चुनाव लड़ना माना जा रहा है. दरअसल केंद्र में बीजेपी को एसकेएम का समर्थन हासिल है, लेकिन इस बार दोनों पार्टियों ने सिक्किम में चुनाव अलग लड़ने का फैसला किया था. एक तरफ पूरे देश में बीजेपी की लहर की बात कही जाती है. वहीं दूसरी ओर सिक्किम में बीजेपी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी. राज्य के निवर्तमान सदन में उसके 12 सदस्य थे.

बीजेपी को केवल 5.18 प्रतिशत वोट ही मिले

सिक्किम विधानसभा के नतीजे रविवार को घोषित किए गए, जिसमें सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) ने 32 में से 31 सीट जीतकर सत्ता बरकरार रखी है. राज्य में इस बार बीजेपी को केवल 5.18 प्रतिशत वोट ही मिल सके. एसकेएम को 58.38 प्रतिशत वोट मिले, जबकि सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट को 27.37 प्रतिशत वोट मिले. इन परिणाम से अंदाजा हो रहा है कि सिक्किम में बीजेपी का प्रदर्शन कितना खराब रहा. ऐसे में ये सवाल उठता है कि जब बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में 400 पार का नारा दिया है, तब सिक्किम में इतना खराब प्रदर्शन क्यों रहा. आइए एक नजर डालते हैं कि सिक्किम में बीजेपी के हार के कुछ प्रमुख कारण क्या रहे.

सिक्किम बीजेपी अध्यक्ष को भी मिली हार

सिक्किम के बीजेपी अध्यक्ष दिली राम थापा अपर बुर्तुक विधानसभा क्षेत्र में एसकेएम उम्मीदवार काला राय से हार गए. मौजूदा विधायक एवं पूर्व मंत्री थापा 2,968 मतों से शिकस्त मिली. जहां राय को 6,723 वोट मिले, वहीं थापा को 3,755 वोट मिले. सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के डी बी थापा को 1,623 वोट मिले, जबकि बी के तमांग (सीएपी-ए) को 581 वोट मिले. बीजेपी ने लाचेन मंगन सीट को छोड़कर 31 विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ा और अधिकांश सीट पर बीजेपी के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई.

सिक्किम में बीजेपी का प्रदर्शन क्यों रहा खराब

भारतीय जनता पार्टी और एसकेएम में सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बनी थी. जिसके बाद इस बार दोनों ही पार्टियों ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था. जाहिर सी बात है कि बीजेपी को अकेले चुनाव लड़ने का नुकसान तो हुआ ही है. वहीं निवर्तमान सिक्किम विधानसभा में बीजेपी के 12 विधायक थे, जिनमें से दस विपक्षी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) के दलबदलू थे.

दोस्त ने ही बिगाड़ा बीजेपी का खेल

बीजेपी और सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा का गठबंधन चुनाव से पहले ही टूट गया था. जिसके बाद दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा. सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा की इस शानदार जीत के पीछे जिस एक शख्‍स का योगदान हैं वो हैं मुख्‍यमंत्री प्रेम सिंह तमांग. जो कि सहयोगी दल के रूप में बीजेपी का केंद्र में समर्थन कर रहे हैं. प्रेम सिंह तमांग यूं तो बीजेपी के दोस्त भी माने जाते हैं, लेकिन इस बार उन्हीं की वजह से बीजेपी सिक्किम में जीरो नंबर तक पहुंच गई है. मतलब कोई सीट हासिल नहीं पाई है.

2019 के चुनाव में भी बीजेपी का रिकॉर्ड निराशाजनक

सिक्किम में 2019 के विधानसभा चुनाव तक भारतीय जनता पार्टी का चुनावी ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ बहुत खराब रहा है. बीजेपी ने 1994 में सिक्किम की चुनावी राजनीति में प्रवेश किया था, जब उसने तीन सीट पर चुनाव लड़ा था और तीनों सीट पर उसकी जमानत जब्त हो गई थी.

भाजपा का चुनावी ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ बहुत खराब

सिक्किम में 2019 के विधानसभा चुनाव तक भाजपा का चुनावी ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ बहुत खराब रहा है. भाजपा ने 1994 में सिक्किम की चुनावी राजनीति में प्रवेश किया था, जब उसने तीन सीट पर चुनाव लड़ा था और तीनों सीट पर उसकी जमानत जब्त हो गई थी.

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भी हारे

सिक्किम भाजपा के अध्यक्ष दिली राम थापा को भी अपनी सीट से हार का सामना करना पड़ा है। मौजूदा विधायक और पूर्व मंत्री थापा राय को अपर बर्टुक विधानसभा क्षेत्र से एसकेएम उम्मीदवार कला राय ने 2,968 वोटों से शिकस्त दी। राय को 6,723 जबकि थापा को 3,755 वोट मिले। वहीं सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के डीबी थापा को 1,623 वोट मिले।भाजपा ने सिक्किम में लाचेन मंगन सीट को छोड़कर बाकी की 31 सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन अधिकतर सीटों पर पार्टी के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। इससे पहले सीट बंटवारे पर बात न बनने पर भाजपा ने मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग के नेतृत्व वाली सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) के साथ गठबंधन तोड़ अकेले चुनाव में उतरने का फैसला किया था।

पांच विधायकों ने छोड़ी थी पार्टी

बता दें कि निवर्तमान सिक्किम विधानसभा में भाजपा के 12 विधायक थे, जिनमें से दस विधायक विपक्षी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) से दलबदल कर आए थे, जबकि दो अन्य एसकेएम के साथ गठबंधन में अक्टूबर 2019 में हुए विधानसभा उपचुनाव में जीते थे। उन 12 में से पांच विधायकों में से ने पार्टी छोड़ दी है, जिनमें से तीन एसकेएम में शामिल हो गए। बाकी सात भाजपा विधायकों में से केवल दो को पार्टी ने इस चुनाव में टिकट दिया था।

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