लोकसभा चुनाव 2024 : अरविंदर सिंह लवली के बदले बोल, कांग्रेस छोड़ BJP में शामिल हुए

नई दिल्लीः दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे अरविंदर सिंह लवली ने शनिवार को बीजेपी ज्वाइन कर ली. इस दौरान बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी मौजूद थे. अरविंदर सिंह लवली ने बीजेपी ज्वाइन करने के बाद मीडिया को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी ज्वाइन करने की वजह भी बताई.

कांग्रेस छोड़ BJP में शामिल हुए अरविंदर सिंह लवली

#WATCH पूर्व कांग्रेस नेता अरविंदर सिंह लवली केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की मौजूदगी में दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में भाजपा में शामिल हुए।

अरविंदर सिंह लवली ने 28 अप्रैल को दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। pic.twitter.com/1xDNeBCIF6

— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 4, 2024

लवली ने कहा, ”हमें बीजेपी के बैनर तले और पीएम मोदी के नेतृत्व में दिल्ली की जनता के लिए लड़ने का अवसर दिया गया है. मुझे पूरा भरोसा है और इस बात का कोई संशय नहीं है कि बीजेपी भारी बहुमत से सरकार बनाने जा रही है. आने वाले दिनों में बीजेपी का झंडा दिल्ली में भी लहराएगा.

दिल्ली को प्यार करनेवाले लूटनेवालों के साथ नहीं: सचदेवा

दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि मैंने पहले ही कहा था कि जो भी व्यक्ति दिल्ली को प्यार करता है, वह दिल्ली को लूटने वालों के साथ खड़ा नहीं हो सकता है। वहीं पूर्व कांग्रेस विधायक राजकुमार चौहान ने कहा- यूं तो समय-समय पर हम अपनी बाते रखेंगे। दिल्ली के शराब घोटाले को लेकर बातें लेकर आएंगे। हमने जो विकास किया था, उसे आगे नहीं बढ़ाया बल्कि दिल्ली को पीछे ले जाने का कार्य किया।

पीएम के हाथ को मजबूत करना चाहते हैं: लवली

अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि पीएम मोदी, नड्डा और अमित शाह का धन्यवाद। जब हम खोए-खोए घूम रहे थे, उस समय इन्होंने मौका दिया है। हम आज पांच वरिष्ठ लोग आए हैं, लेकिन बहुत लोग हैं जो चाहते हैं कि देश को सशक्त सरकार मिले। देश के विकास में पीएम के हाथ को मजबूत करना चाहते हैं।

आज मेरे लिए विशेष दिन: हरदीप सिंह

वहीं हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि आज मेरे लिए विशेष दिन है। मैं दिल्ली का ही हूं। दिल्ली में जब विकास का कार्य हुआ, तब राजकुमार चौहान और लवली मंत्री रहे। देश और दिल्ली में ये सभी लोग विकास कार्य को आगे बढ़ाएंगे। इन सभी की सेवाओं का उपयोग किया जाएगा। सभी को बधाई।इस दौरान हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इनका योगदान और इनकी क्षमता हमें पता है. मैं यह आश्वस्त करता हूं कि आपकी सेवा का इस्तेमाल किया जाएगा और उसका प्रभावी रूप से इस्तेमाल किया जाएगा. हमारी पार्टी को आप जैसे नेताओं की जरूरत है. आप हमारे परिवार को ज्वाइन कर रहे हैं और मैं आपका स्वागत करता हूं.”

एक साल के अंदर कांग्रेस में लौटे थे लवली

बता दें, यह पहली बार नहीं है जब लवली कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। उन्होंने इससे पहले साल 2017 में भी टिकट वितरण में नाराजगी को लेकर इस्तीफा दिया था। लेकिन फरवरी 2018 में एक साल से भी कम समय में वह कांग्रेस में लौट आए थे। तब उन्होंने कहा था कि मेरे लिए भाजपा में जाना कोई खुशी का निर्णय नहीं था। तब मैंने पीड़ा में फैसला लिया था।’

लवली ने क्यों दिया था इस्तीफा?

इस्तीफा देने के बाद अरविंदर सिंह लवली ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि मैंने अपने लिए नहीं दिया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए मैंने ये इस्तीफा दी है। उन्होंने कहा कि यदि मेरा इस्तीफा स्वीकार हुआ है तो बावरिया जी का धन्यवाद। किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने को लेकर उन्होंने कहा कि मैं किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने नहीं जा रहा हूं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वर्कर ने यह नहीं कहा कि मौजूदा केजरीवाल सरकार को हमने क्लीनचिट दे दिया है। उन्होंने कहा कि मैंने अपने मन की पीड़ा दिल्ली के तमाम कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पीड़ा को कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास भेज दिया है। मेरी पीड़ा उसूलों को लेकर है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

अरविंदर सिंह लवली के बीजेपी में शामिल होने पर दिल्ली कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा “कुछ लोगो की फितरत ऐसी होती है कि जब बाप को सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तो बेटा सबसे ज्यादा परेशान करता है। कांग्रेस ने अरविंदर सिंह लवली को बेटे की तरह माना। कांग्रेस ने अरविंदर सिंह लवली को सब कुछ दिया। आज अरविंदर लवली ने अपना किरदार दिखा दिया। कांग्रेस बहुत बड़ा समुद्र है।”

कौन हैं अरविंदर लवली ?

1998 में 30 साल के लवली दिल्ली के सबसे युवा विधायक बने थे। शीला दीक्षित सरकार में वह राज्य के सबसे युवा मंत्री भी थे। शीला दीक्षित के कार्यकाल में उन्हें शिक्षा, परिवहन और शहरी विकास जैसे अहम मंत्रालय मिले। लवली के मंत्री रहते ही ब्लूलाइन बसों की जगह नई और बेहतर व्यवस्था लाई गई। उन्हीं के मंत्री रहते दिल्ली आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए निजी स्कूलों में 25 फीसदी आरक्षण लागू करने वाला पहला राज्य बना। 2013 में उनकी अगुआई में कांग्रेस को हार झेलनी पड़ी। हालांकि, उन्होंने आम आदमी पार्टी का समर्थन किया। 2015 में कांग्रेस को बुरी तरह हार मिली। 2017 में वह बीजेपी में चले गए। 2018 में फिर कांग्रेस में लौट आए। अब उन्होंने दोबारा कांग्रेस छोड़ बीजेपी का हाथ थामा है।

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