पोखरण के 50 साल, दुनिया में सुनाई दी थी राजस्थान के इन 2 गांवों की गूंज

नई दिल्ली – अमेरिका के अत्याधुनिक सैटेलाइट से बचाकर लंबी तैयारी के बाद 11 और 13 मई 1998 को पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में किए गए सिलसिलेवार पांच परमाणु धमाकों से पोकरण के खेतोलाई की धरती जरूर हिल गई थी लेकिन उसकी गूंज पूरी दुनिया ने सुनी थी. 26 वर्ष पूर्व ऑपरेशन शक्ति पोकरण द्वितीय के नाम से भारत ने पूरी दुनिया को आंख दिखाकर अपनी धाक जमाई थी. पूर्व राष्ट्रपति और तत्कालीन डीआरडीओ निदेशक डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था – ‘आई लव खेतोलाई.’

भारत ने परमाणु परीक्षण किया

50 साल पहले भारत ने परमाणु परीक्षण किया था. भारत ऐसा करके परमाणु क्लब का छठा सदस्य बन गया था. लेकिन भारत को उस परमाणु हथियार के रूप में परीक्षण करने में 24 साल लगे. 1998 में पांच परमाणु परीक्षण तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में किए गए. इसमें तीन परमाणु परीक्षण 11 मई 1998 और दो 13 मई 1998 को किए गए थे.

न्यूक्लियर वेपन एक्सरसाइज

रूस ने अभी घोषणा की है कि वह टेक्टिकल न्यूक्लियर वेपन एक्सरसाइज करेगा, जिनका उपयोग शहरों और बड़े सैन्य लक्ष्यों पर हमला करने वाले रणनीतिक हथियारों के विपरीत युद्ध के मैदान में किया जा सकता है. अमेरिका भी अपनी बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों की तैनाती के संकेत दे रहा है. ऐसे में क्या आज हमें नए परमाणु हथियारों का परीक्षण करने की ज़रूरत है? क्या हमें और अधिक परमाणु परीक्षणों की आवश्यकता है?

परमाणु परीक्षण ऑपरेशन शक्ति पोकरण

11 मई 1998 को दोपहर करीब पौने तीन बजे किया गया था परमाणु परीक्षण ऑपरेशन शक्ति पोकरण द्वितीय को करने के लिए देश के वैज्ञानिकों को दिन-रात कड़ी मेहनत और तैयारियां का लंबा सफर तय करना पड़ा. इस दौरान स्थानीय के साथ ही देश-विदेश की सुरक्षा एजेंसियों तक को कानों-कान भनक तक नहीं लगने दी गई. हालांकि परमाणु परीक्षण के तीन घंटे पूर्व खेतोलाई के निवासियों को रेंज में नियमित अभ्यास की सूचना देकर आगाह किया गया, लेकिन तब तक उन्हें भी परमाणु परीक्षण की जानकारी नहीं थी. जब 11 मई 1998 को दोपहर करीब पौने तीन बजे परमाणु परीक्षण किया और देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने शाम पांच बजे मीडिया के समक्ष इसकी सार्वजनिक रूप से घोषणा की, तब देशवासियों को इसकी जानकारी हुई.

रक्षा पर सबसे अधिक खर्च

शंकर का कहना है कि 1967 में परमाणु ऊर्जा अपनाने का निर्णय लेने के बाद भारत ने रक्षा पर सबसे अधिक खर्च किया. भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण 1974 में किया. हम हमेशा से जानते थे कि 1964 के बाद से चीन एक परमाणु प्रतिद्वंद्वी था. 1948 और 1965 में हम पहले ही पाकिस्तान के साथ दो युद्ध कर चुके थे, भारत अपने रक्षा कार्यक्रमों, पारंपरिक और परमाणु दोनों पर खर्च करने के लिए तैयार था. 1963 के बाद की समय में जब हमारा रक्षा खर्च सबसे अधिक था, यह हमारे लिए स्पष्ट था कि हमें अपनी रक्षा स्वयं करनी थी और शायद इसीलिए जब हम परमाणु हथियार कार्यक्रम के लिए गए थे.

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