तीसरी बार पीएम बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी से की मुलाकात-देखें वीडियो

नई दिल्लीः राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की शुक्रवार को संयुक्त बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीसरी बार सर्वसम्मति से नेता सदन के रूप में चुन लिया गया है. जिसके बाद नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे.एनडीए संसदीय दल का नेता चुने जाने के बाद नरेंद्र मोदी पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्‍ण आडवाणी से मिलने पहुंचे। वे यहां पीएम पद की शपथ लेने से पहले उनसे आशीर्वाद लेने पहुंचे। इस दौरान उन्‍होंने वरि‍ष्‍ठ भाजपा नेता को गुलदस्‍ता भेंट किया। वहां आडवाणी की बेटी प्रतिभा भी मौजूद थीं।इसके बाद वे वरिष्‍ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी से मुलाकात करने पहुंचे। मालूम हो कि दोनों ही नेताओं ने भाजपा को 2 सीटों से आगे बढ़ाकर सरकार बनाने तक जितना बहुमत हासिल करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

नरेंद्र मोदी ने आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी से की मुलाकात

एनडीए का नेता चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी आज दिल्ली में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के आवास पर पहुंचे और उनसे मुलाकात की. इस दौरान पीएम मोदी ने भारत रत्न लालकृष्ण आडवाणी से आशीर्वाद लिया.

#WATCH | PM Narendra Modi meets Bharat Ratna and veteran BJP leader LK Advani at the latter’s residence in Delhi. pic.twitter.com/fZtIlOj5yw

— ANI (@ANI) June 7, 2024

मोदी 3.0 के लिए तैयारियां शुरू हो चुकी

लोकसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद से मोदी 3.0 के लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोदी रविवार की शाम को 6 बजे प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। बता दें कि चुनावों में आशातीत प्रदर्शन न कर पाने के बावजूद NDA के पास 293 सांसद हैं, जो 543 सदस्यीय लोकसभा में बहुमत के 272 के आंकड़े से ज्यादा है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह सहित बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास पर गुरुवार को दिनभर बैठक की और सरकार गठन के प्रयासों को गति देने को लेकर विचार-विमर्श किया।

सिर झुकाकर प्रणाम करता हूं-मोदी

एनडीए संसदीय दल के नेता चुने जाने के बाद पीएम मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि मेरे लिए खुशी की बात है कि इतने बड़े समूह को आज मुझे यहां स्वागत करने का अवसर मिला है. जो साथी विजयी होकर आए हैं, वो सभी अभिनंदन के अधिकारी हैं. लेकिन, जिन लाखों कार्यकर्ताओं ने दिन-रात परिश्रम किया है. इतनी भयंकर गर्मी में हर दल के कार्यकर्ता ने जो पुरुषार्थ और परिश्रम किया है, मैं आज उनको सिर झुकाकर प्रणाम करता हूं.

संविधान को माथे से लगाया

पीएम मोदी इस जीत के बाद जब पुराने संसद भवन के सेंट्रल हॉल में बैठक के लिए पहुंचे तो उन्होंने भारत के संविधान को अपने माथे से लगा लिया. वहीं, पीएम मोदी के बैठते ही ‘मोदी-मोदी’ के नारे से पूरा हॉल गूंज उठा. इसके साथ ही गठबंधन दल के प्रमुख नेता पीएम मोदी के पक्ष में संबोधन के लिए आए और एक-एक कर पीएम मोदी के नेतृत्व को समर्थन की घोषणा की. वहीं, पीएम मोदी को संसदीय दल का नेता चुनने के लिए जदयू के समर्थन की घोषणा करने के बाद बिहार के सीएम नीतीश कुमार उनका पैर छूना चाह रहे थे. लेकिन, पीएम मोदी ने उन्हें ऐसा करने से रोका और उनके हाथ को अपने हाथ में थाम लिया.

9 जून को होगा शपथ ग्रहण समारोह

इसके पहले संविधान सदन के सेंट्रल हाल में एनडीए संसदीय दल की बैठक में नरेंद्र माेदी को लगातार तीसरी बार दल का नेता चुना गया। एनडीए ने राष्‍ट्रपति के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया है। वे रविवार 9 जून को राष्‍ट्रपति‍ भवन में प्रधानमंत्री के पद व गोपनीयता की शपथ लेंगे। उनके साथ अन्‍य मंत्री भी शपथ लेंगे।

नीतीश कुमार ने दिया समर्थन

दरअसल, बैठक में अपनी पार्टी की तरफ से नरेंद्र मोदी को संसदीय दल का नेता चुनने का समर्थन करते हुए नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी की तरफ से भाषण दिया और फिर वापस अपनी कुर्सी पर लौटे तो पीएम मोदी का झुककर पैर छूने की कोशिश की. लेकिन, पीएम मोदी ने उनको ऐसा करने से रोका और दोनों ने झुककर एक-दूसरे का अभिवादन स्वीकार किया.नीतीश कुमार ने पीएम मोदी के पक्ष में अपनी पार्टी का समर्थन जताते हुए कहा कि 10 साल से यह प्रधानमंत्री हैं और इन्होंने देश की खूब सेवा की. विपक्षी दलों ने आज तक देश के लिए कुछ नहीं किया. पीएम मोदी ने बहुत कुछ किया है और आगे भी आपको जो भी करना है करिए, हम आपके साथ हैं। मैं तो चाहता हूं, आज ही शपथ ग्रहण कर काम शुरू कर दीजिए.नीतीश कुमार ने कहा कि इस बार तो कुछ इधर-उधर लोग जीत गए हैं, लेकिन, अगली बार जब आप आइएगा तो ये सभी हार जाएंगे.

अपने-अपने समीकरण

नरेंद्र मोदी को जब 2013 के गोवा अधिवेशन में बीजेपी ने अपना चेहरा बनाने की घोषणा की थी तो पार्टी के साथ ही NDA में भी खेमेबंदी हो गई थी. एक तबका आडवाणी को चेहरा बनाने के पक्ष में था. उस दौरान बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार और TDP सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू का आडवाणी के प्रत‍ि ज्‍यादा झुकाव माना जाता था. नीतीश कुमार ने तो तत्‍काल एनडीए से अलग होने की घोषणा कर दी थी, जबकि चंद्रबाबू नायडू ने साल 2018 में एनडीए से अलग होने का ऐलान किया था. हालांकि, इससे दोनों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था. चंद्रबाबू नायडू एक बार फिर से एनडीए में आए और लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनावों में भी कमाल का प्रदर्शन किया. इन चुनावों में वह किंगमेकर बनकर उभरे हैं.

आडवाणी से मुलाकात के मायने

लोकसभा चुनाव-2024 का परिणाम सामने आ चुका है, लेकिन इस बार भाजपा अपने दम पर स्‍पष्‍ट बहुमत हासिल नहीं कर सकी है. बीजेपी को 240 सीटें मिली हैं, जबकि सामान्‍य बहुमत के लिए 272 सांसदों की जरूरत होती है. दूसरी तरफ, एनडीए को 293 सीटें मिली हैं, ऐसे में बीजेपी इस गठबंधन को पूरी तरह से मजबूत बनाए रखना चाहती है, ताकि नई सरकार सफलतापूर्वक पांच साल का कार्यकाल पूरा कर सके. एनडीए नेता चुने जाने के बाद नरेंद्र मोदी ने लालकृष्‍ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी से मुलाकात कर अपने पार्टनर्स को स्‍पष्‍ट संकेत दे दिया है कि वह अपने सहयोगियों को साथ लेकर चलेंगे.

एनडीए 400 पार’ सीटों के नारे के साथ चुनाव में उतरा था

बता दें कि एनडीए ‘अब की बार 400 पार’ सीटों के नारे के साथ चुनाव में उतरा था, लेकिन 4 जून को आए नतीजों में 300 का आंकड़ा भी नहीं छू सका, उसे 293 सीटें ह‍ासिल हुईं; जो बहुमत 272 सीट के आंकड़े से काफी अध‍िक है। इस बार भाजपा ने 240 सीटें जीती हैं जो पिछली बार 303 के मुकाबले 63 कम हैं। वहीं, एनडीए में दूसरा सबसे बड़ा दल टीडीपी है। इसके पास 16 सांसद हैं। वहीं, तीसरे नंबर पर नीतीश कुमार की जदयू है। जदयू ने इस बार 12 सीटों पर जीत हासिल की हैं। इसके अलावा, चिराग की लोजपा (रामविलास) के 5 सांंसद, पवन कल्‍याण की जनसेना, महाराष्‍ट्र में

अटल बिहारी वाजपेयी के साथ लालकृष्‍ण आडवाणी NDA के शिल्‍पकार

अटल बिहारी वाजपेयी के साथ लालकृष्‍ण आडवाणी NDA के शिल्‍पकारों में थे. 90 के अंतिम दशक में जब बीजेपी सिंगल लार्जेस्‍ट पार्टी बनकर उभरी थी, तब गठबंधन की सरकार चलाने की जिम्‍मेदारी पार्टी पर आन पड़ी थी. अट‍ल बिहारी वाजपेयी एक सर्वमान्‍य चेहरा थे, लेकिन एक बड़ा तबका आडवाणी के साथ दिखने से बचने की कोशिश करते थे. ऐसे में वाजपेयी ने गठबंधन को फ्रंट से लीड किया, जबकि लालकृष्‍ण आडवाणी ने पर्दे के पीछे और आगे रहकर NDA को मूर्त रूप देने का काम किया था. आडवाणी ने भाजपा को शून्‍य से लेकर सत्‍ता के शिखर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. NDA का तानाबाना बुनने में आडवाणी की भूमिका काफी अहम रही थी.

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