झारखंड के मंत्री आलमगीर आलम की ईडी ने नौ घंटे से ज्यादा की पूछताछ ,मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है मामला

नई दिल्लीः झारखंड के मंत्री और कांग्रेस नेता आलमगीर आलम धनशोधन मामले में पूछताछ के लिए मंगलवार को यहां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश हुए और अधिकारियों ने उनसे नौ घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की। राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री आलम अपराह्न करीब 11 बजे ईडी कार्यालय पहुंचे। वह रात में करीब साढ़े आठ बजे ईडी कार्यालय से बाहर आए। उन्होंने ईडी कार्यालय से बाहर आने के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘मुझसे जो भी सवाल पूछे गए मैंने उनका जवाब दिया है।’ जब उनसे सवाल किया गया कि क्या एजेंसी ने उन्हें कल फिर बुलाया है, तो आलम ने कहा कि वह इसका जवाब बाद में देंगे।

आलमगीर आलम मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी के सामने हुए पेश

#WATCH | Jharkhand Minister Alamgir Alam arrives at the office of the Enforcement Directorate in Ranchi, in connection with a huge cash recovery from the household help of his PS Sanjeev Lal

He says, “I am a person who follows the law…” pic.twitter.com/nLekfo8Hlf

— ANI (@ANI) May 14, 2024

बता दें कि ईडी ने पिछले हफ्ते आलमगीर आलम के निजी सचिव और राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी संजीव कुमार लाल (52) और घरेलू सहायक जहांगीर आलम (42) को उनसे जुड़े एक फ्लैट से 32 करोड़ रुपये से अधिक कैश जब्त करने के बाद गिरफ्तार किया था। मंत्री आलमगीर आलम को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपना बयान दर्ज कराने के लिए मंगलवार को रांची में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के क्षेत्रीय कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया था। आलमगीर आलम मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए बीते मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश हुए।ईडी अधिकारियों ने उनसे 9 घंटे तक पूछताछ की।

आलमगीर आलम से 9 घंटे से ज्यादा पूछताछ

सूत्रों के अनुसार आलमगीर आलम को आज दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया है। इससे पहले, आलम (70) ने संघीय एजेंसी के कार्यालय में प्रवेश करने से पहले संवाददाताओं से कहा, मैं कानून का पालन करता हूं… मैं पूछताछ का सामना करने के लिए यहां आया हूं। ईडी ने पिछले सप्ताह आलम के निजी सचिव और राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी संजीव कुमार लाल (52) और घरेलू सहायक जहांगीर आलम (42) को उनसे जुड़े एक फ्लैट से 32 करोड़ रुपये से अधिक नकदी जब्त करने के बाद गिरफ्तार किया था।

आलमगीर आलम ने पत्रकारों से कही ये बात

आलम ने संघीय एजेंसी के कार्यालय में प्रवेश करने से पहले पत्रकारों से कहा, “मैं कानून का पालन करता हूं… मैं पूछताछ का सामना करने के लिए यहां आया हूं।” ईडी ने पिछले सप्ताह आलम के निजी सचिव और राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी संजीव कुमार लाल (52) और घरेलू सहायक जहांगीर आलम (42) को उनसे जुड़े एक फ्लैट से 32 करोड़ रुपये से अधिक नकदी जब्त करने के बाद गिरफ्तार किया था।

ग्रामीण विकास विभाग में बड़े खेल का खुलासा

मंत्री को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपना बयान दर्ज कराने के लिए मंगलवार को रांची में ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया था। धनशोधन की जांच राज्य के ग्रामीण विकास विभाग में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। इससे पहले ये भी खुलासा हुआ था कि ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं में टेंडर मैनेज करने से लेकर भुगतान में कमीशन की वसूली होती थी और इसका निश्चित हिस्सा बड़े अफसरों और राजनेताओं तक पहुंचता था। ईडी ने इन्हें रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में जो पिटीशन दिया था, उसमें बताया गया है कि संजीव कुमार लाल ही कमीशन वसूलता था और इसका प्रबंधन करता था। मंत्री को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपना बयान दर्ज कराने के लिए मंगलवार को रांची में ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया था। धनशोधन की जांच राज्य के ग्रामीण विकास विभाग में कथित अनियमितताओं से संबंधित है।

वीरेंद्र राम की गिरफ्तारी के बाद से बढ़ता जा रहा जांच का दायरा

ग्रामीण कार्य विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम की गिरफ्तारी के बाद से ही ईडी की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। जांच के घेरे में बड़े-बड़े अधिकारी व नेता आने वाले हैं। इसी कड़ी में मंत्री आलगीर आलम से पूछताछ भी होने जा रही है।
दरअसल, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, झारखंड ने 11 जनवरी 2020 को कनीय अभियंता सुरेश प्रसाद वर्मा व आलोक रंजन के विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम में चार्जशीट की थी।उक्त चार्जशीट के आधार पर ही ईडी ने 17 सितंबर 2020 को केस दर्ज किया था।

क्या है मामला

दरअसल, 13 नवंबर 2019 को एसीबी जमशेदपुर में जय माता दी इंटरप्राइजेज के ठेकेदार विकास कुमार शर्मा ने सड़क निर्माण विभाग के कनीय अभियंता सुरेश प्रसाद वर्मा के विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
उनका आरोप था कि सुरेश प्रसाद वर्मा ने उनके लंबित चार लाख 54 हजार 964 रुपये के बकाया भुगतान को जारी करने के एवज में 28 हजार रुपये की रिश्वत मांगी है। एसीबी ने सत्यापन के बाद सुरेश प्रसाद वर्मा को 14 नवंबर 2019 को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। उसी दिन एसीबी ने सुरेश प्रसाद वर्मा की पत्नी पुष्पा वर्मा के आवास पर छापेमारी की थी, जहां से 63 हजार 870 रुपये नकदी, जेवरात, जमीन व बैंक से संबंधित कागजात मिले थे।

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