चुनाव में हार के बाद भी बनाया मंत्री,2014 से अब तक तीन बार ऐसा कर चुके है पीएम मोदी-जानें

नई दिल्लीः मोदी के मंत्रिमंडल में 71 मंत्रियों ने शपथ ली। मगर सबसे अधिक निगाहें पंजाब से आने वाले रवनीत सिंह बिट्टू पर रहीं। दरअसल, चुनाव हारने के बाद भी रवनीत सिंह बिट्टू को मोदी की टीम में शामिल किया गया। हालांकि यह पहला वाकया नहीं है। इससे पहले भी पंजाब में लोकसभा चुनाव हारने वाले दो नेताओं को प्रधानमंत्री मोदी अपनी टीम में शामिल कर चुके हैं।

कद्दावर नेताओ को नहीं मिली जगह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जो तीसरा मंत्रिमंडल है, उसमें हारने वाले तो किनारे लगाए ही गए हैं, जीतने वालों में भी कई कद्दावर लोगों को जगह नहीं दी गई है. उदाहरण के तौर पर स्मृति ईरानी, आरके सिंह, संजीव बालियान, अर्जुन मुंडा और अजय मिश्रा टेनी समेत 15 से ज्यादा मंत्री चुनाव हारकर तीसरी सरकार में मंत्री बनने की रेस से बाहर हो गए हैं. तो वहीं जीतने के बावजूद दूसरी मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके अनुराग ठाकुर जैसे कद्दावर नेता भी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हैं. हालांकि, पंजाब की लुधियाना सीट से करीब 20 हजार वोटों से चुनाव हारने के बाद भी रवनीत सिंह बिट्टू को मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिल गई है.

अरुण जेटली

पंजाब की अमृतसर लोकसभा सीट पर 2014 में दिग्गज भाजपा नेता अरुण जेटली ने चुनाव लड़ा था। मगर कांग्रेस ने उनके खिलाफ कैप्टन अमरिंदर सिंह को उतार दिया था। नतीजा यह हुआ कि अरुण जेटली को 102770 मतों से हार का सामना करना पड़ा। हार के बावजूद मोदी के पहले कार्यकाल में अरुण जेटली का कद बढ़ा और उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया।

हरदीप सिंह पुरी

लोकसभा चुनाव हारने के बाद मंत्री बनने वाले नेताओं में हरदीप सिंह पुरी का भी नाम शामिल है। 2019 में हरदीप सिंह पुरी ने पंजाब के अमृतसर लोकसभा सीट से भाजपा की टिकट पर पहली बार चुनाव लड़ा था। कांग्रेस प्रत्याशी गुरजीत सिंह औजला ने पुरी को 99626 मतों से शिकस्त दी थी। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव हारने के बावजूद हरदीप सिंह पुरी को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी दी। उन्हें अपने दूसरे कार्यकाल में आवास और शहरी मामलों व पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री बनाया।

रवनीत सिंह बिट्टू

पंजाब की लुधियाना लोकसभा सीट से दो बार के सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने चुनाव से पहले भाजपा ज्वाइन की। मगर भाजपा की टिकट पर लुधियाना से चुनाव नहीं जीत सके। उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने 20942 मतों से हरा दिया। मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्री के तौर पर बिट्टू को अपनी टीम में शामिल कर बड़ा तोहफा दिया है।

भाजपा की निगाहें अब पंजाब में हैं

दरअसल, भाजपा की निगाहें अब पंजाब में हैं। पार्टी यहां हर हाल में अपने पैर पसारना चाहती है। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को दो-दो सीटों पर जीत मिली थी। अरुण जेटली भाजपा के बड़े चेहरे थे। हार के बावजूद उन्हें कैबिनेट में शामिल करना लाजिमी था। 2019 में हरदीप पुरी को अमृतसर सीट जीतने का टास्क दिया गया, लेकिन कामयाबी नहीं मिलने पर भी मोदी ने उन्हें निराश नहीं किया।नवजोत सिंह सिद्धू के पार्टी से जाने के बाद भाजपा को पंजाब में एक बड़े सिख चेहरे की तलाश है। शायद अब उसकी निगाहें रवनीत सिंह बिट्टू पर टिकी हैं। इसकी झलक बिट्टू के एक बयान पर दिखती है। शपथ ग्रहण से पहले बिट्टू ने कहा था कि अगर सीएम बनने का मौका मिला तो जरूर बनेंगे।

जीतने वाले भी बन चुके मंत्री

पंजाब से चुनाव जीतकर आने वाले चेहरों को भी मोदी की टीम में जगह मिल चुकी है। शिअद नेता हरसिमरत कौर बादल दो बार केंद्रीय मंत्री रहीं। होशियारपुर से पूर्व सांसद विजय सांपला मोदी के पहले कार्यकाल में मंत्री बने थे। दूसरे कार्यकाल में होशियारपुर से चुनाव जीतने वाले सोम प्रकाश को केंद्र में राज्य मंत्री बनाया गया था।

पंजाब में रवनीत बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा

रवनीत बिट्टू की इस बात से इतना तो तय है कि अब पंजाब में बीजेपी का सबसे बड़ा कोई चेहरा बन रहा है, वो हैं रवनीत सिंह बिट्टू. बीजेपी अपने सबसे पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल से हाथ छुड़ा चुकी है और जिस तरह के नतीजे लोकसभा चुनाव में आए हैं, उसने साफ कर दिया है कि अब बीजेपी पंजाब में अकेले दम पर ही राजनीति करेगी.इसके लिए उसे जिस फायरब्रांड नेता की जरूरत है, वो रवनीत सिंह बिट्टू ही हैं. इसके अलावा पंजाब में इस बार लोकसभा चुनाव के जो नतीजे आएं हैं और उनमें जिन दो निर्दलीय सांसदों ने जीत दर्ज की है, उसने बीजेपी ही नहीं बल्कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को भी सचेत कर दिया है.

मंत्रिमंडल की औसत उम्र 59 साल

मोदी सरकार 3.0 की औसत उम्र 59 साल है। पिछली बार यह औसत उम्र 61 साल थी, हालांकि 2021 में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में यह घटकर 58 साल रह गई थी। इस बार सबसे उम्रदराज मंत्रियों में 79 साल के जीतनराम मांझी हैं तो वहीं सबसे कमउम्र के टीडीपी के 36 वर्षीय के राममोहन नायडू और बीजेपी की 37 वर्षीया रक्षा खड़से हैं। पीएम नरेंद्र मोदी को मिलाकर उनकी सरकार में लगभग एक दर्जन चेहरे 70 साल या उससे ज्यादा के हैं।

सरकार में महिला और युवा चेहरे

मोदी सरकार में इस बार युवा और महिलाओं का एक संतुलन दिखा। हालांकि महिलाओं को ज्यादा भागीदारी नहीं मिली पाई। उनमें तकरीबन 15 चेहरे 50 साल या उससे कमउम्र के हैं। युवा चेहरों में के राममोहन नायडू, रवनीत सिंह बिट्टू, साबित्री ठाकुर, शांतनु ठाकुर, एल. मुरुगन, कमलेश पासवान, रक्षा खड़से, सतीश दुबे, राजभूषण चौधरी निषाद, जितिन प्रसाद, जयंत चौधरी, चंद्रशेखर पेम्मासामी, चिराग पासवान, मनसुख मांडविया शामिल हैं। उनमें से अधिकांश चेहरे जमीन से जुड़े और अपने मेहनत व संघर्ष से यहां तक पहुंचे हैं। सरकार में करीब छह महिलाएं जगह बना सकीं, जो कुल मंत्रियों का 10 फीसदी भी नहीं हैं। उनमें से निर्मला सीतारमण, शोभा करंदलाजे, अनुप्रिया पटेल को फिर मौका मिला है। पहली बार सरकार में मंत्री बनने वालों में तीन बार की सांसद रक्षा खड़से, सावित्री ठाकुर और अन्नपूर्णा देवी प्रमुख हैं।

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