गुजरात में 2019 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले कम वोटिंग,कौनसी पार्टी को होगा फायदा और नुकसान?-जानें

नई दिल्लीः गुजरात लोकसभा चुनाव 2024 के मतदान में चार फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने बुधवार (8 मई) को प्रदेश की 25 लोकसभा सीटों का अंतिम डाटा जारी किया. चुनाव आयोग के अनुसार इस बार गुजरात में 60.13 प्रतिशत मतदान हुआ है, जो 2019 के आम चुनावों की तुलना में 3.98 प्रतिशत कम है. 2019 चुनाव में 26 लोकसभा सीटों पर 64.11 प्रतिशत मतदान हुआ था. हालांकि, इस बार सूरत लोकसभा सीट पर बीजेपी निर्विरोध चुनाव जीत गई थी.

दक्षिण गुजरात में आदिवासी आरक्षित वलसाड निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक मतदान

चुनाव आयोग के अनुसार दक्षिण गुजरात में आदिवासी आरक्षित वलसाड निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक 72.71 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि सौराष्ट्र क्षेत्र की अमरेली सीट पर सबसे कम 50.29 प्रतिशत मतदान हुआ. वलसाड 2019 में भी 75.22 प्रतिशत मतदान के साथ सबसे ऊपर था. वहीं भरूच में 69.16 प्रतिशत और बनासकांठा सीटों पर 69.62 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. यहां सत्तारूढ़ बीजेपी और इंडिया गठबंधन के बीच कांटे की टक्कर थी.

उपचुनाव में 62.68 प्रतिशत वोटिंग

वहीं एसटी आरक्षित सीट छोटा उदयपुर, दाहोद और बारडोली में पिछले चुनाव की तुलना में इस बार मतदान में गिरावट दर्ज की गई. इस बार छोटा उदयपुर में 69.15 फीसदी वोटिंग, दाहोद में 59.31 प्रतिशत मतदान और बारडोली में 64.81 प्रतिशत वोटिंग हुई. बता दें वोटों की गिनती 4 जून को होगी. वहीं राज्य की पांच विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए भी मंगलवार को मतदान हुआ था.चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार पांच विधानसभा क्षेत्रों विजापुर, पोरबंदर, माणावदर, खंभात और वाघोडिया में 62.68 प्रतिशत मतदान हुआ. बता दें मौजूदा विधायकों के इस्तीफे के बाद यह पांच सीटें खाली हो गई थी. गुजरात में लोकसभा की 26 सीटें हैं. सभी सीटों पर फिलहाल बीजेपी के सांसद हैं. यहां मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच है, जबकि आम आदमी पार्टी भी इंडिया गठबंधन के तहत एक सीट पर चुनाव लड़ रही है. प्रदेश में 25 सीटों पर कांग्रेस लड़ रही है, तो भरूच सीट आम आदमी पार्टी को दी गई है.

तीसरे चरण में गुजरात की 25 सीटों पर 59.51 फीसदी वोट

लोकसभा चुनावों के तीसरे चरण में गुजरात की 25 सीटों पर 59.51 फीसदी वोट डाले गए। 25 लोकसभा सीटों में सबसे ज्यादा मतदान वलसाड लोकसभा पर हुआ तो वहीं सबसे कम मतदान अमरेली लोकसभा सीट दर्ज किया गया। पूरे गुजरात में बनासकांठा लोकसभा सीट ऐसी रहीं जहां पर 2019 की तुलना में 3.76 फीसदी अधिक मतदान हुआ। बनासकांठा में कुल वोटिंग 68.44 रही। 2019 में 64.68 फीसदी वोट पड़े थे। गुजरात में लोकसभा चुनावों के दौरान क्षत्रिय आंदोलन छाया रहा। क्षत्रिय आंदोलन की संकलन समिति ने दावा किया है कि समुदाय के लोगों 80 फीसदी वोट डाले हैं। ऐसे में बीजेपी को सात सीटों पर नुकसान हो सकता है, हालंकि बीजेपी एक बार फिर से आश्वस्त है कि वह राज्य क्लीन स्वीप की हैट्रिक लगाएगी। पिछले लोकसभा चुनावों की तुलना में गुजरात में पांच फीसदीकम वोटिंग हुई। एक अनुमान के तौर पर 1.90 करोड़ गुजरातियों ने वाेट नहीं डाला।

चर्चित सीटों पर कम रही वोटिंग

गुजरात में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गांधीनगर से लड़ने के कारण यह सीट चर्चा में थी। इसी सीट 58.08 प्रतिशत मतदान हुआ, तो वहीं प्रदेश प्रमुख सीआर पाटिल की नवसारी सीट पर 55.79 फीसदी वोट डाले। क्षत्रिय विवाद के बाद सुर्खियों में आई राजकोट की सीट पर 58.28 फीसदी वोट पड़े। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया की पोरबंदर सीट पर 51.76 फीसदी वोट पड़े। मनसुख मांडविया के सामने पाेरबंदर में कांग्रेस ने स्थानीय नेता ललित वसोया को मैदान में उतारा था। मांडविया गुजरात के भावनगर से ताल्लुक रखते हैं।

बनासकांठा-वलसाड ने चौंकाया

गुजरात में सिर्फ दो लोकसभा सीटें ऐसी रहीं जहां मत प्रतिशत ज्यादा रहा। आदिवासी बहुल वलसाड लोकसभा सीट पर पूरे राज्य में सर्वाधिक वोट पड़े। यहां पर 72.24 वोटिंग हुई। इस सीट पर कांग्रेस के तेजतर्रार विधायक अनंत पटेल और बीजेपी कैंडिडेट धवल पटेल के बीच मुकाबला है। इस सीट पर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सभा की थी। बनासकांठा गुजरात की ऐसी सीट रही है जो मतदान प्रतिशत में दूसरे नंबर पर रही। यह गुजरात की एकमात्र ऐसी सीट थी। जहां पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों न महिलाओं को उतारा था। कांग्रेस की जेनीबेन ठाकोर और बीजेपी की रेखाबेन चौधरी के बीच मुकाबले की वजह से चर्चा में आई इस सीट पर पीएम मोदी और प्रियंका गांधी दोनों ने रैली की थी। इस सीट पर कुल 68.44 वोटिंग हुई। जो 2019 से 3.76 प्रतिशत अधिक है। ऐसे में इस सीट पर बीजेपी जहां अपनी जीत का निश्चिंत है तो वहीं कांग्रेस को उलटफेर की उम्मीद है।

नया आंकड़ा किसके लिए है शुभ?

आयोग की तरफ से वोटिंग का फाइनल आंकड़ा जारी किए जाने के बाद राज्य में 25 लोकसभा सीटों पर जीत हार को लेकर नए सिर से चर्चा छिड़ गई है। पिछले चुनावों पर नजर दौड़ाएं तो कम वोटिंग होने पर अभी तक कांग्रेस को फायदा होता आया है। 60 फीसदी से ऊपर वोटिंग में बीजेपी का पलड़ा भारी रहा है। 2014 और 2019 के चुनावों में 60 फीसदी से अधिक वोटिंग हुई तो बीजेपी को सभी 26 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस पार्टी ज्यादा मतदान को अपने पक्ष में मान रही है। दोनों पार्टियों की तरफ से जीत के दावे किए जा रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस 24 और आम आदमी पार्टी दो सीटों पर मिलकर लड़े थे। बीजेपी ने अकेले सभी 26 सीटों पर चुनाव लड़ा था।

कांग्रेस को इन सीटों से उम्मीद

गुजरात में सात मई को 43 डिग्री तापमान के बीच वोट डाले गए थे। ऐसे में मतदान कम रहने की आशंका व्यक्त की गई थी, लेकिन मतदान के आंकड़े के 60 फीसदी से ऊपर जाने से बीजेपी के खेमे में खुशी है। राज्य की 26 लोकसभा सीटों में सूरत सीट बीजेपी पहले ही जीत चुकी हैं। ऐसे में चार जून को जब ईवीएम खुलेंगी तो गुजरात की तस्वीर साफ होगी। पिछले चुनावों में ज्यादा वोटिंग का आंकड़ा भले ही कांग्रेस के पक्ष में नहीं रहा है लेकिन कांग्रेस पार्टी को कई सीटों पर जीत की उम्मीद है। पार्टी को उम्मीद है कि बनासकांठा, वलसाड और आणंद के साथ जामनगर जैसी सीटों पर उलटफेट सामने आ सकता है। गुजरात की वलसाड लोकसभा सीट पर सबसे ज्यादा वोटिंग हुई है तो वहीं बनासकांठा में 2019 की तुलना में ज्यादा वोट पड़े हैं। सबसे कम वोटिंग अमरेली में हुई है।

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