क्यों मनाया जाता है विश्व पर्यावरण दिवस ? जानें इतिहास,महत्व और इस साल की थीम

नई दिल्लीः एक बेहतर जिवन जिने के लिए पर्यावरण का अच्छा होना बहुत जरूरी है. लेकिन आजकल प्रदूषण दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है. सिर्फ कारखानों और फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं ही नहीं, इस बढ़ते प्रदूषण के पीछे बहुत के कारण जिम्मेदार है. ऐसे में इसे कम करना और पर्यावरण का बचाव करना बेहद जरूरी है. क्योंकि आज के समय में प्रदूषण के कारण अस्थमा जैसी सांस से जुड़ी कई बीमारियां दिन पर दिन बढ़ती जा रही हैं.

क्यों मनाया जाता है विश्व पर्यावरण दिवस

प्रकृति से जुड़ी समस्याओं के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है. इस मौके पर पर्यावरण को लेकर नागरिकों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए जगह-जगह पर कार्यक्रम किए जाते हैं. इस मौके पर वातावरण में हो रहे नुकसान के बारे में लोगों को बताया जाता है.

आजकल प्रदूषण बढ़ने की बहुत ही वजह हैं

कारखानों और फैक्ट्रियों के अलावा आजकल प्रदूषण बढ़ने की बहुत ही वजह हैं. इंसान की बूरी आदतें जैसे पानी बर्बाद करना, दूषित करना और पेड़ों को काटना जैसी की चीजों की वजह से पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है. जिसका नतीजा बाद में मानव को प्राकृतिक आपदाओं का सामान करेके भुगतना ही पड़ता है.अगर आप घूमने के शौकीन हैं तो आपने देखा होगा कि लोग पहाड़ों और नदियों वाली जगह घूमने जाते हैं और वहां कूड़ा-कचरा फेंक देते हैं. जिनमें प्लास्टिक सबसे ज्यादा पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है. इसलिए पर्यावरण को बचाने के लिए सबसे पहले खुद जागरूक होने और अपने आप में बदलाव लाने की भी जरूरत है.

एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित

विश्व पर्यावरण दिवस हमें सिर्फ एक दिन प्रकृति के बारे में सोचने के लिए नहीं, बल्कि हर दिन पर्यावरण के प्रति सचेत रहने और उसे बचाने के लिए अपनी जिम्मेदारियों को समझने और एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करता है. अगर हर एक व्यक्ति पौधे लगाना, वाहनों का इस्तेमाल कम करना, पानी बचाने से लेकर कई छोटे-छोटे कदम उठाएगा. इसके लिए आगे बढ़ेगा और पर्यावरण की रक्षा करने की जिम्मेदारी उठाएगा तो इन छोटे-छोटे प्रयास से पर्यावरण की सुरक्षा की जा सकती हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए ये बहुत जरूरी है.

कब हैं विश्व पर्यावरण दिवस

प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्व पर्यावरण दिवस जून माह में मनाते हैं। इस खास दिन को मनाने की एक तारीख निर्धारित है। भारत समेत दुनियाभर में 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर विभिन्न देश अलग अलग तरीके से पर्यावरण को लेकर अपने नागरिकों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।

पर्यावरण दिवस का इतिहास

पर्यावरण दिवस मनाने की नींव 1972 में पड़ी, जब संयुक्त राष्ट्र संघ ने पहला पर्यावरण दिवस मनाया है और हर साल इस दिन को मनाने का एलान किया। विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का फैसला साल 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा स्टॉकहोम सम्मेलन में किया गया था. जिसकी थीम पर्यावरण संरक्षण थी. इसके बाद हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस सेलिब्रेट करने का निर्णय लिया गया था. 5 जून 1974 में पहली बार ये खास दिन मनाया गया.

विश्व पर्यावरण दिवस का महत्व

भारत समेत पूरे विश्व में प्रदूषण काफी तेजी से फैल रहा है. इस वजह से हमारी प्रकृति को काफ़ी नुकसान हो रहा है. प्रकृति को प्रदूषण से बचाने के लिए पर्यावरण दिवस को मनाया जाता है. इस दिन लोगों को प्रकृति के प्रति जागरूक किया जाता है और प्रदूषित होने से बचाने के लिए प्रेरित किया जाता है.

5 जून को ही क्यों मनाते हैं पर्यावरण दिवस

दरअसल, पहला पर्यावरण सम्मेलन 5 जून 1972 को मनाया गया था, जिसमें 119 देशों ने भाग लिया था। स्वीडन की राजधानी स्टाॅकहोम में सम्मेलन हुआ। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानव पर्यावरण पर स्टाॅकहोम सम्मेलन के पहले दिन को चिन्हित करते हुए 5 जून को पर्यावरण दिवस के तौर पर नामित कर लिया।

पर्यावरण दिवस की थीम 2024

प्रतिवर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की एक खास थीम होती है। पिछले साल यानी विश्व पर्यावरण दिवस 2023 की थीम “Solutions to Plastic Pollution” थी। यह थीम प्लास्टिक प्रदूषण के समाधान पर आधारित है। इस साल विश्व पर्यावरण दिवस 2024 की थीम “Land Restoration, Desertification And Drought Resilience” है। इस थीम का फोकस ‘हमारी भूमि’ नारे के तहत भूमि बहाली, मरुस्थलीकरण और सूखे पर केंद्रित है।

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