क्या पंडित नेहरू के रिकॉर्ड की बराबरी कर पाएंगे पीएम मोदी ?,4 जून को होगा फैसला

नई दिल्लीः लोकसभा चुनाव-2024 के छह चरणों का मतदान पूरा हो चुका है। एक मई को 7वें और आखिरी चरण के लिए वोटिंग होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी के तमाम नेता इस बार 400 पार सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं। वहीं विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A भी अपनी जीत का दावा कर रहा है। देश की सत्ता हासिल करने के लिए 272 सीटें जीतने की जरूरत है। बीजेपी 2014 और फिर 2019 में भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई। भारत में लोकतंत्र चुनाव में बहुमत हासिल करने का रास्ता कुछ राज्यों से होकर जाता है। इसमें यूपी, बिहार जैसे राज्य शामिल हैं। भारत के अलावा अमेरिका और अन्य देशों में भी बहुमत का गणित अलग ही है। आखिर देश में सरकार बनाने के लिए बहुमत का गणित क्या है? क्या मोदी देश के पहले पीएम नेहरू के रिकॉर्ड की बराबरी कर पाएंगे? आइए समझते हैं।

पीएम मोदी को कहां से मिलती है ऊर्जा?

लगातार कई-कई घंटे काम करने और प्रचंड गर्मी में भी कई-कई चुनावी जनसभाओं को संबोधित करने वाले पीएम मोदी से जब ये पूछा गया कि आखिर इतनी ऊर्जा उन्हें मिलती कहां से है तो प्रधानमंत्री ने कहा, “मेरा 15 साल की उम्र के बाद का समय ऐसे ही परिश्रम से गुजरा है. कठिनाइयों में जीने की आदत से गुजरा है. सुख-सुविधा से मेरा कोई लेना-देना नहीं रहा है, क्योंकि मैंने जब भी जो काम मुझे मिला तो उसको एक कर्तव्य के भाव से और कुछ सीखने के इरादे से मैं करता रहा हूं. जब आप जीवन भर एक विद्यार्थी अवस्था में होते हैं तो मन से आप हमेशा फ्रेश रहते हैं. आपको हर बार नई चीज सीखने की इच्छा रहती है. शरीर की रचना में मन की अवस्था का बहुत महत्व होता है. मेरे केस में मेरे भीतर का विद्यार्थी जीता रहता है. बिल्कुल ही जीवंत है तो हर बार कुछ नया सीखने-समझने की मेरी इच्छा रहती है.”

भारत में 4 राज्यों से जाता है बहुमत का रास्ता

इधर भारत में भी ऐसी ही स्थिति बन रही है, जहां ‘बहुमत जीतना’ कुछ राज्यों पर निर्भर करता है। खास तौर पर 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद से। 2019 में बीजेपी ने 543 लोकसभा सीटों में से 303 सीटें जीतीं। पॉलिटिकल मैप पर नजर डालने से हमें 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन की जीत की बुनियादी जानकारी मिलती है। क्या एनडीए 2024 के लोकसभा चुनावों में भी अपना प्रदर्शन दोहराएगा, बेहतर प्रदर्शन करेगा या फिर बहुमत खो देगा? इसका जवाब काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि वह 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों में से सिर्फ चार में कैसा प्रदर्शन करता है।

इन चुनावी फॉर्म्युले से समझिए पूरी बात

इस चुनावी गणित को आसान भाषा में समझने के लिए हम चुनावी विश्लेषक यशवंत देशमुख के 100-200-243 फॉर्म्युला का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए, हम राज्यों को तीन श्रेणियों में बांटते हैं। पहली श्रेणी में वो राज्य जहां बीजेपी मुख्य रूप से चुनावी जंग में नहीं है, दूसरे में जहां बीजेपी पूरी तरह से हावी है और तीसरी श्रेणी में वो राज्य जहां बीजेपी क्षेत्रीय दलों के साथ कड़ी टक्कर में है।

दक्षिण के राज्यों में बीजेपी कर रही संघर्ष

चार दक्षिणी राज्यों तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल और तेलंगाना में बीजेपी अभी भी अपनी छाप छोड़ने के लिए संघर्ष कर रही है। पिछले दो लोकसभा चुनावों में पार्टी यहां 101 में से केवल चार सीटें ही जीत पाई थी। हालांकि, इस बार बीजेपी को अपनी सीटों की संख्या में बढ़त होने की उम्मीद है। मुख्य रूप से तेलंगाना में, लेकिन इसका पूरे देश की चुनावी तस्वीर पर बहुत ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है।

बीजेपी बनाम कांग्रेस

मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी कांग्रेस के साथ सीधे चुनावी लड़ाई में आगे है। राज्यों में कांग्रेस के साथ आमने-सामने की लड़ाई में, बीजेपी ने 2019 में 138 लोकसभा सीटों में से 133 और 2014 में 138 में से 121 सीटें हासिल कीं। यहां तक कि उन राज्यों में भी जहां भाजपा और कांग्रेस ने अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, बीजेपा ने देश की सबसे पुरानी पार्टी के खिलाफ शानदार सफलता हासिल की।

क्षेत्रीय क्षत्रपों का जाल

बीजेपी के सामने असली चुनौती उन राज्‍यों से है जहां क्षेत्रीय क्षत्रपों का कब्‍जा है या वहां की सियासत में उलटफेर हालिया वर्षों में होते रहे हैं. बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और महाराष्‍ट्र ऐसे ही राज्‍य हैं. इन राज्‍यों की 151 लोकसभा सीटें हैं जहां से बीजेपी को सीधे चुनौती मिलती दिख रही है.

बांग्‍लार लड़ाई

पिछले लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने राज्‍य की 42 लोकसभा सीटों में से 18 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया. ममता बनर्जी की सत्‍तारूढ़ टीएमसी को 22 सीटें मिलीं. उसके बाद से ही बीजेपी ने लगातार इस राज्‍य पर फोकस किया है. पीएम मोदी ने भी हालिया एक इंटरव्‍यू में कहा था कि बंगाल में इस बार बीजेपी को सबसे ज्‍यादा फायदा होगा. विश्‍लेषकों के मुताबिक बीजेपी की रणनीति ये है कि अन्‍य राज्‍यों में होने वाले नुकसान की भरपाई बंगाल से की जाए. लेकिन सीएम ममता बनर्जी के नेतृत्‍व में टीएमसी को किसी भी मायने में हलका नहीं आंका जा सकता क्‍योंकि तमाम प्रयास करने के बावजूद बीजेपी ममता बनर्जी को लगातार तीसरी बार 2021 में सत्‍ता में आने से नहीं रोक सकी.

नवीन बाबू का करिश्‍मा

लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी और राज्‍य में नवीन पटनायक के नेतृत्‍व में सत्‍तारूढ़ बीजू जनता दल (BJD) ने गठबंधन करने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं होने के कारण एक दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं. ओडिशा में 21 लोकसभा सीटें हैं. पिछली बार बीजेपी को इनमें से आठ और बीजेडी को 12 मिली थीं. इस बार बीजेपी का लक्ष्‍य यहां पर 15 से भी अधिक सीटें जीतने का है. लेकिन उसके सामने नवीन पटनायक के करिश्‍माई नेतृत्‍व की चुनौती है. इस वक्‍त नवीन बाबू देश में लगातार सबसे अधिक समय तक सीएम रहने वाले दूसरे मुख्‍यमंत्री हैं. राज्‍य में लोकसभा के साथ विधानसभा के भी

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