कोलोरेक्टल कैंसर : शरीर में नजर आ रहे इन बदलावों को न करें नजरअंदाज,कैंसर का संकेत हो सकती हैं ये दिक्कतें

नई दिल्लीः कोलोरेक्टल कैंसर एक प्रकार का कैंसर हे, जो बड़ी आंत में होता है। बड़ी आंत पाचन, पानी के अवशोषण और बेकार चीज़ों को शरीर से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कोलन कैंसर अक्सर समय रहते पता नहीं चल पाता, क्योंकि ज़्यादातर लोगों में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते, जब तक कैंसर एडवान्स्ड स्टेज तक नहीं पहुंच पाता। इसके अलावा कुछ शुरूआती लक्षण उलझन में डाल देते हैं, जिससे कैंसर के निदान में देरी होती है। इन लक्षणों की सही और जल्द से जल्द पहचान कर समय पर कैंसर का निदान किया जा सकता है, इससे उपचार की लागत कम हो जाती है, साथ ही उपचार के परिणाम भी बेहतर मिलते हैं और मरीज़ के लम्बे समय तक जीवित रहने की संभावना बढ़ती है। कोलोरेक्टल कैंसर का जल्द निदान होने से 90 फीसदी मामलों में इलाज सफल होता है।

कैंसर एक जानलेवा बीमारी

कैंसर एक जानलेवा बीमारी है, जो शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है। कैंसर के कई प्रकार होते हैं, जिनमें से कुछ बेहद घातक होते हैं। पिछले दशकों से भारत में कोलन कैंसर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। कोलन कैंसर एक प्रकार का कैंसर है, जो बड़ी आंत में होता है। इसे कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer) भी कहा जाता है। बड़ी आंत का काम पचे हुए खाने को छोटी आंत से मलाशय तक पहुंचाना होता है। कोलन कैंसर की शुरुआत आमतौर पर पॉलिप्स नामक कोशिकाओं के छोटे समूह के रूप में शुरू होती है, जो आंत के अंदर बनते हैं। यह कैंसर आंत से शुरू होकर शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने लगता है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है। कोलन कैंसर होने पर शरीर में कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। इन लक्षणों की सही समय पर पहचान कर इलाज शुरू करने से मरीज की जान बचाई जा सकती है। आज इस लेख में हम आपको कोलन कैंसर के लक्षणों (Colon Cancer Symptoms In Hindi) के बारे में बताने जा रहे हैं।

आंत के कैंसर के लक्षण

कैंसर रोग विशेषज्ञ कहते हैं, आंत के कैंसर का इलाज संभव है, खासकर अगर प्रारंभिक अवस्था में ही इसका पता चल जाए। हालांकि इसके पूरी तरह से ठीक होने की संभावना कम होती है क्योंकि यह विकसित होता है और एक पूर्ण बीमारी में बदल जाता है। शुरुआती पहचान और उपचार से रोग को गंभीर रूप लेने से रोकने में मदद मिल सकती है। प्रारंभिक चरण के कोलोरेक्टल कैंसर के कारण लोगों को अचानक वजन कम होने, शौच के साथ खून आने जैसी दिक्कतें हो सकती है। वैसे ये लक्षण अल्सर, बवासीर या क्रोहन रोग जैसी बीमारियों में भी हो सकते हैं, इसलिए स्थिति के सही निदान के लिए चिकित्सक से जरूर संपर्क करें।

मलत्याग की आदतों में बदलाव

अगर आपको मलत्याग की आदतों में बदलाव महसूस हो जैसे डायरिया, कब्ज़, मल के रंग में बदलाव आदि तो यह कोलन कैंसर का संकेत हो सकता है। इन लक्षणों पर ध्यान दें, हालांकि ये अन्य कारणों से भी हो सकते हैं। लेकिन अगर ये लक्षण कुछ दिनों से ज़्यादा बने रहें तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

पेट में दर्द

अगर आपको पेट में दर्द, ऐंठन या असहजता हो तो यह कोलन कैंसर का कारण हो सकता है। इसके साथ कभी कभी पेट फूलना या भरा हुआ महसूस होना, ऐसे लक्षण भी होते हैं

मल के साथ खून आना

अगर आपको मल के साथ खून आता है तो यह कोलन कैंसर का संकेत हो सकता है। हालांकि इस बात पर ध्यान दें, मल के साथ खून आने के अन्य कारण भी सकते हैं जैसे हीमेरॉइड या एनल फिशर। हालांकि आप खुद इस बारे में मत सोचिए, इसके बजाए डॉक्टर से जांच कराइए। जिससे अगर कोलन कैंसर है तो इसके निदान में देरी न हो।

बिना कारण वज़न कम होना

अगर आपका वज़न बेवजह कम हो रहा है, तो यह कोलन कैंसर का संकेत हो सकता है क्योंकि कैंसर के कारण शरीर में मेटाबॉलिज़्म, खाना पचाने के तरीके में बदलाव आता है। जिससे वज़न कम हो जाता है।

थकान और कमज़ारी

अगर आप असामान्य रूप से थकान या कमज़ोरी महसूस करते हैं, तो यह कोलन कैंसर का संकेत हो सकता है। क्योंकि कोलन कैंसर के कारण शरीर में हीमोग्लोबिन कम हो जाता है, जिसकी वजह से एनीमिया और थकान होने लगती है।

इन लक्षणों के बारे में भी जानिए

आंत के कैंसर की स्थिति में मल से खून आने, नियमित रूप से मलत्याग के समय में बदलाव, बार-बार शौच जाने की समस्या या कब्ज बने रहने की दिक्कत भी शामिल हैं। इसके अलावा कुछ लोगों को पेट के पिछले हिस्से में ठोस गांठ भी महसूस हो सकती है। इस तरह के लक्षणों की शिकायत पुरुषों- महिलाओं दोनों में देखे जा सकते हैं। इन लक्षणों के बारे में अपने डॉक्टर से बात करना महत्वपूर्ण है।

किन्हें इसका खतरा अधिक होता है?

अध्ययनों से पता चलता है कि आंत के कैंसर के विकसित होने का कोई एक खास कारण नहीं है, इसके कई कारक हो सकते हैं। नियमित धूम्रपान करने वालों को इस स्थिति का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा जिन लोगों को पहले से अल्सरेटिव कोलाइटिस या क्रोहन रोग जैसी दिक्कत लंबे समय तक रह चुकी हो या आंतों से संबंधित कोई दिक्कत लगातार बनी हुई है, उन्हें इस बारे में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

लक्षण नजर आने पर क्या करें?

विशेषज्ञों के मुताबिक सभी लोगों को अपने जोखिम कारकों को समझते हुए कैंसर के लक्षणों की लगातार निगरानी करते रहना चाहिए। जिन लोगों में इनमें से एक या अधिक लक्षण लगातार बने रहते हैं, उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करके स्थिति का समय रहते निदान करा लेना चाहिए। ध्यान रखें समय पर रोग का पता चलने और इलाज मिल जाने पर कैंसर को बढ़ने से रोकने और जान बचाने की संभावना अधिक हो जाती है।

कोलन कैंसर की जांच

कोलन कैंसर के लक्षण, फिजिकल एग्जामिनेशन, पर्सनल और फैमिली हिस्ट्री के आधार पर डॉक्टर ब्लड टेस्ट और कोलोनोस्कोपी कराने की सलाह देते हैं। इसके अलावा, कोलोन कैंसर की पुष्टि के लिए सीटी स्कैन और एमआरआई आदि की सलाह दी जाती है।

कोलन कैंसर से बचाव कैसे करें?

डाइट में हरी सब्जियां, फल और साबुत अनाज शामिल करें।

रोजाना कम से कम 30 मिनट कोई न कोई फिजिकल एक्टिविटी करें।

मैदा, नमक, चीनी, रेड मीट और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम से कम करें।

धूम्रपान और शराब का सेवन न करें।

अपने वजन को नियंत्रित रखने का प्रयास करें।

The post कोलोरेक्टल कैंसर : शरीर में नजर आ रहे इन बदलावों को न करें नजरअंदाज,कैंसर का संकेत हो सकती हैं ये दिक्कतें appeared first on bignews.

[#content_wordai] 

Share This Article
Leave a comment