इजराइल में अलजजीरा प्रसारण पर लगाई रोक ,नेतन्याहू कैबिनेट ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बताया खतरा

नई दिल्लीः इजरायल ने कतर के स्वामित्व वाले मीडिया चैनल अल जज़ीरा के स्थानीय कार्यालयों को बंद करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्रीन बेंजामिन नेतन्याहू की कैबिनेट ने रविवार को इजराइल में अल जज़ीरा के स्थानीय कार्यालयों को गाजा में युद्ध जारी रहने तक बंद करने का फैसला किया है।

इजराइल में अलजजीरा पर पाबंदी

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कैबिनेट ने रविवार को गाजा में युद्ध जारी रहने तक इज़राइल में अल जज़ीरा के संचालन को बंद करने का फैसला लिया है. इजरायल की तरफ से कहा गया है कि अल जजीरा (Al Jazeera) का प्रसारण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की खबर के अनुसार कैबिनेट के फैसले के बाद नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि इज़रायल में उकसाने वाला चैनल अल जज़ीरा को बंद कर दिया जाएगा. एक सरकारी बयान में कहा गया है कि इज़रायल के संचार मंत्री ने “तुरंत कार्रवाई” करने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिया है. हालांकि अल जजीरा इसे रोकने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है.

अल जज़ीरा ने इस कदम को बताई “आपराधिक कार्रवाई”

नेतन्याहू की कैबिनेट ने फैसले के पीछे तर्क दिया कि कतरी टेलीविजन नेटवर्क से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है। वहीं, अल जज़ीरा ने इस कदम को “आपराधिक कार्रवाई” कहा है और इस आरोप को खारिज कर दिया कि टेलीविजन नेटवर्क से इजरायली सुरक्षा को खतरा है। चैनल ने कहा कि यह एक “खतरनाक और हास्यास्पद झूठ” है जो उसके पत्रकारों के खिलाफ फैलाया जा रहा है। चैनल ने कहा कि उसके पास इस मामले को लेकर “हर कानूनी कदम उठाने” का अधिकार सुरक्षित है।

गाजा में इजरायल के सैन्य अभियान की आलोचना

वहीं, इजरायली उपग्रह और केबल टेलीविजन प्रदाताओं ने सरकार के फैसले के बाद अल जज़ीरा के प्रसारण को बंद कर दिया। संचार मंत्रालय ने कहा कि स्टेशन पर पुलिस छापेमारी चल रही है। चैनल को वित्त पोषित किया गया है, और कतरी सरकार द्वारा और गाजा में इजरायल के सैन्य अभियान की आलोचना की गई है।इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को कहा कि उनकी सरकार ने कतर के स्वामित्व वाले प्रसारक अल जजीरा के स्थानीय कार्यालय को बंद करने के लिए सर्वसम्मति से मतदान किया है। इजराइल-हमास के युद्ध के दौरान इजराइल और चैनल के बीच संबंध में और ज्यादा खटास पैदा हुई है।

अलजजीरा ने बताया हमारा हमास से कोई संबंध नहीं

अलजजीरा ने इजराइल में अपने प्रसारण पर लगे बैन की पुष्टि खुद की। चैनल की ओर से बताया गया है कि इजराइल के दूरसंचार मंत्री ने कैमरे, माइक्रोफोन, सर्वर और लैपटॉप, साथ ही वायरलेस ट्रांसमिशन को जब्त करने के आदेश दिए गए हैं। यहां तक कि उनके जर्नलिस्ट (पत्रकारों) के फोन भी कब्जे में लेने के आदेश हैं।अलजजीरा ने कैबिनेट के आरोपों को निराधार बताते हुए लिखा कि उसका हमास से कोई संबंध नहीं है। चैनल पहले भी इन आरोपों पर जवाब देता आया है। चैनल ने यह भी कहा कि इजराइल के इस फैसले का असर जंग को रोकने के लिए कतर की कोशिशों पर पड़ सकता है। साथ ही कतर के साथ इजराइल के संबंध खराब होने का खतरा भी हो सकते हैं।

31 जुलाई तक ही लागू रहेगा बैन

नेतन्याहू पिछले एक महीने से अलजजीरा पर बैन की तैयारी कर रहे थे। लेकिन, इसके लिए इजराइली संसद की मंजूरी जरूरी थी। नेतन्याहू ने सबसे पहले संसद के वरिष्ठ मंत्रियों की मदद से एक बिल पास कराया जिससे अलजजीरा नेटवर्क को बंद किया जा सके। इसके बाद कैबिनेट की बैठक बुलाई गई।हालांकि, नेतन्याहू केवल 31 जुलाई तक ही चैनल पर बैन लगा सकते हैं। बैन को आगे बढ़ाने के लिए उनको फिर से संसद की मंजूरी चाहिए होगी।

क्या कतर-इजराइल के रिश्तें बिगड़ेंगे?

इजराइल ने अलजजीरा पर उस वक्त बैन लगाया है जब कतर हमास और इजराइली सरकार के बीच जंग रुकवाने के लिए बिचौलिए की भूमिका निभा रहा है। हाल ही में नेतन्याहू ने कतर पर आरोप लगाए थे कि वो सीजफायर के लिए हमास पर ठीक से दबाव नहीं डाल रहा है।जंग को 7 महीने हो चुके हैं। इस बीच केवल एक बार 6 दिनों के लिए जंग रुकी है। पिछले साल दिसंबर के बाद से दोनों के बीच कोई डील पर सहमति नहीं बन पाई है। दूसरी तरफ, मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा भी किया गया कि कतर बिचौलिए का रोल छोड़ सकता है।

अलजजीरा ने POK को पाकिस्तान का हिस्सा बताया

2015 की बात है। अलजजीरा ने एक कार्यक्रम के दौरान भारत के नक्शे को गलत दिखाया। कुछ नक्शों में पाक अधिकृत कश्मीर एवं अक्साई चिन को भारत का हिस्सा नहीं दिखाया गया था। लक्षदीप एवं अंडमान द्वीप के कुछ इलाके भी नक्शों में नहीं थे। इस पर सूचना एवं प्रासरण मंत्रालय ने चैनल पर 5 दिन का बैन लगा दिया था।

इज़राइल में नेटवर्क के कार्यालयों को 45 दिनों के लिए बंद करने की अनुमति

इज़रायल की संसद ने पिछले महीने एक कानून को मंजूरी दी थी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा माने जाने वाले विदेशी प्रसारकों को इज़रायल में अस्थायी रूप से बंद करने की अनुमति देता है. यह कानून नेतन्याहू और उनके मंत्रिमंडल को इज़राइल में नेटवर्क के कार्यालयों को 45 दिनों के लिए बंद करने की अनुमति देता है, इस समय सीमा को बढ़ाया जा सकता है. इसलिए यह जुलाई के अंत तक या गाजा में जारी सैन्य अभियान तक लागू रह सकता है. बता दें कि नेतन्याहू सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है जब हमास के साथ संघर्ष विराम से जुड़ी बातचीत कतर में तेजी पकड़ रही है। न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू के ऑफिस ने एक बयान में कहा कि यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होगा। फैसले के तहत इजरायल में चैनल के ऑफिस को बंद करना, उसके प्रसारण उपकरण जब्त करना, चैनल की रिपोर्ट का प्रसारण रोकना और उसकी वेबसाइट को ब्लॉक करना शामिल हो सकता है।

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